ऑटो


फेस्टिव सीजन में कारों पर डिस्काउंट? ढूंढते रह जाओगे- 5 OCT
कारों की बढ़ती
मांग के कारण आगामी त्योहारी सीजन में बाजार की चाल बदल सकती है। आमतौर पर त्योहारी सीजन में कार कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए भारी भरकम डिस्काउंट देती आई हैं, लेकिन इस बार कंपनियां ग्राहकों को डिस्काउंट देने के मूड में नहीं हैं। लोकप्रिय कारों की मांग के मुकाबले सप्लाई कम है। इसलिए इस त्योहारी सीजन में गाडि़यों पर शायद ही डिस्काउंट मिले। मारुति सुजुकी, ह्युंडई मोटर्स इंडिया और टाटा मोटर्स जैसी बड़ी कार कंपनियों ने डिस्काउंट में कटौती की है। हालांकि, इससे तीसरी तिमाही में कंपनियों की बिक्री बढ़ाने में मदद मिल सकती थी।
हालांकि, इस साल ऑटोमोबाइल बाजार में हालात पूरी तरह से बदल गए हैं। चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीने में कार की बिक्री में 34 फीसदी का इजाफा हुआ है। इस दौरान कुल 9.6 लाख वाहनों की बिक्री हुई है। उदाहरण के तौर पर सितंबर 2007 में जहां ह्युंडई सैंट्रो पर 50,000 रुपए से ज्यादा का डिस्काउंट था, वह घटकर 40,000 रुपए तक आ गया और साल 2009 में यह 37,000 रुपए था। इस साल इस डिस्काउंट में और गिरावट आने के आसार हैं।

ह्युंडई के डायरेक्टर (सेल्स) अरविंद सक्सेना ने बताया, 'जब हम मांग पूरी करने के लिए संघर्ष कर रहे हों तो ऐसे में डिस्काउंट के लिए सवाल कहां उठता है।' त्योहारी सीजन को देखते हुए कई दूसरी कंपनियों ने भी अपने डिस्काउंट में कटौती की है। टोयोटा ने इस साल अपनी सारी गाडि़यों के दाम 29,000 रुपए तक बढ़ाने के बाद अब इनोवा एमयूवी में 30,000 रुपए का डिस्काउंट दे रही है। कंपनी ने इस मॉडल पर साल 2007 में 60,000 रुपए तक की छूट ग्राहकों को दी थी।

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हादसे से पहले ड्राइवर को अलर्ट करेगी स्मार्ट कार- जब आप हाइवे पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से कार दौड़ा रहे हों, उस
समय सड़क पार करती हुई भैंस आपका मूड खराब कर सकती है। क्या आपकी कार को खुद सड़क पार करती भैंस के बारे में पता चल सकता है? क्या आपकी कार इतनी स्मार्ट हो सकती है कि वह खुद सड़क की किसी अव्यवस्था पर नजर रखे और संभावित हादसे को टाल दे। कार में लगी एक चिप से किसी जानवर को पास आते देखकर तेज आवाज (हाई फ्रीक्वेंसी साउंड) पैदा होती है।

यह आवाज इस तरह के संभावित हादसे के बारे में आपको अलर्ट कर देती है। कार को अधिक स्मार्ट बनाने की कोशिश में चिप कंपनियां लगी हैं। यह बातचीत सोशल नेटवर्क (फेसबुक/ट्विटर) पर हो सकती है या बगल से गुजरती किसी तेज रफ्तार कार से बचाने के लिए इमरजेंसी सिग्नल के रूप में हो सकती है। भारत में हालांकि अब तक बहुत ऊंचे स्तर के कम्युनिकेशन सिस्टम के लिए माहौल तैयार नहीं हुआ है, लेकिन इस तरह के पुराने फीचर को ही स्थानीय जरूरतों के हिसाब से ढालने की तैयारी चल रही है।

सेमीकंडक्टर फर्म फ्रीस्केल के वीपी एवं कंट्री मैनेजर (इंडिया) गणेश गुरस्वामी ने कहा, 'अमेरिका में कई ऐसी सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें गाड़ी के आगे अचानक हिरण आ गए। दुर्घटना की गंभीरता की वजह से गाड़ी और उसमें बैठे लोगों को काफी चोट आती थी।' उन्होंने कहा कि इस तरह का चिप डेवलप करने का मकसद यह है कि अगर कार के रास्ते में कोई चीज आती है तो कार से हाई फ्रीक्वेंसी आवाज निकलती है। इससे चालकों को सावधान होने का मौका मिल जाता है और दुर्घटना टल सकती है।

दो वाहनों के बीच (इंटर ह्वीकल) कम्युनिकेशन तभी संभव है, जब एक ओपन प्लेटफॉर्म हो और सभी वाहन कम्युनिकेशन सिग्नल को पहचान कर उसके हिसाब से रिस्पॉन्ड कर सकें। इस सुविधा के लिए सरकार की हिस्सेदारी भी महत्वपूर्ण है। हालांकि भारत में ऐसी तकनीक विकसित करने में काफी समय लग सकता है, लेकिन एनएक्सपी जैसे चिप मैन्युफैक्चरर वाहनों के लिए ओपन प्लेटफॉर्म बनाने में जुट गए हैं।

कंपनी का भारत में आरएंडडी सेंटर भी है। एनएक्सपी के वीपी एवं एमडी (इंडिया) नीरज पालीवाल ने बताया कि चिप निर्माताओं का एक कंसोर्शियम नीदरलैंड में इंटेलिजेंट ट्रैफिक सिस्टम के लिए रणनीतिक प्लेटफॉर्म का फील्ड ट्रायल शुरू कर चुका है। इस कार्यक्रम को डच सरकार ने भी समर्थन दिया है। इस काम में चिप निर्माता कंपनियों की एक टीम जुटी है। टीम में एनएक्सपी एवं कैटेना, टॉमटॉम और ग्रीनकैट जैसी कंपनियां शामिल हैं।

टीम एक ऐसे प्रोजेक्ट पर भी काम कर रही है जिसमें एक निश्चित समय में कार को पहचानने, उसकी स्पीड का अनुमान लगाना और एक जगह से दूसरे जगह तक पहुंचने में लगने वाला समय शामिल है। नीरज ने बताया, 'इन मापकों के साथ कार चालक को किसी खास इलाके से गुजरते वक्त उसके एलसीडी पैनल पर सिग्नल आने लगेंगे।' इस सिस्टम के पीछे की तकनीक के बारे में नीरज ने कहा, 'ट्रैफिक लाइट पर चिप लगाए जाते हैं जिससे वह किसी खास इलाके में आपकी कार को स्पीड सिग्नल भेज सके। अगर उस रूट पर कहीं ट्रैफिक जाम जैसी समस्या होती है तो आपको सिग्नल मिल सकता है कि आप किसी दूसरे रूट का प्रयोग करें।'