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EPFO का दावा, कंपिनयां में 9.5% रिटर्न देने का दम - नई दिल्ली पीएफ की रकम 
पर 9.5 फीसदी ब्याज देने की सरकारी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की घोषणा उन कंपनियों या एग्जेम्प्ट ट्रस्टों को नागवार गुजरी है जो अपने कर्मचारियों की भविष्य निधि की रकम का प्रबंधन करती हैं, क्योंकि उनका मानना है कि उनके पास 9.5 फीसदी रिटर्न देने के लिए अतिरिक्त रकम नहीं है, लेकिन ईपीएफओ के एक हालिया अध्ययन का इस बारे में कुछ अलग ही कहना है। इस अध्ययन के मुताबिक, ईपीएफओ का कहना है कि अपने कर्मचारियों के पीएफ की रकम का प्रबंधन करने वाली कंपनियां या एग्जेम्प्ट ट्रस्ट ईपीएफओ द्वारा घोषित 9.5 फीसदी के बराबर रिटर्न देने की स्थिति में हैं।

ईपीएफओ के एक अधिकारी ने कहा, 'उनके (एग्जेम्प्ट ट्रस्टों) पास पर्याप्त अतिरिक्त रकम है, जिससे वे न सिर्फ ईपीएफओ द्वारा घोषित 9.5 फीसदी के बराबर रिटर्न दे सकते हैं, बल्कि आने वाले वर्षों में भी 8-9 फीसदी रिटर्न दे सकते हैं।' अधिकारी ने कहा कि यह विश्लेषण चार बड़े फंडों के अध्ययन पर आधारित है। ईपीएफओ ने वित्त वर्ष 2010-11 के लिए पीएफ की रकम पर 9.5 फीसदी ब्याज दर देने की घोषणा की है, क्योंकि उसे एकाउंटिंग के नए नियम से 1,731 करोड़ रुपए की अतिरिक्त रकम का पता चला है। दरअसल, ईपीएफओ ने 1952 के बाद अपने सस्पेंस एकाउंट्स की जांच नए तरीकों से की, जिससे इस रकम का पता चला।

ईपीएफओ 2005-06 से पीएफ पर 8.5 फीसदी का रिटर्न दे रहा था। अभी तक ईपीएफओ कैश बेस्ड एकाउंटिंग के जरिए लेखाजोखा करता था। कैश बेसिस एकाउंटिंग के तहत आमदनी को तब बहीखाते में शामिल किया जाता है जब रकम असल में मिल जाती है और खर्च को तब लिखित रूप में रखा जाता है, जब वह सही मायने में खर्च हो जाए। जबकि एक्रुअल बेसिस एकाउंटिंग के तहत आमदनी और खर्च को उसी वक्त शामिल कर लिया जाता है, जब उसका पता चलता है और इसमें इस बात से फर्क नहीं पड़ता है कि रकम वास्तविक रूप में कब मिलती है या कब इसका भुगतान किया जाता है।

हालांकि, ईपीएफओ द्वारा अतिरिक्त रिटर्न देने की घोषणा से उन कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जो अपने कर्मचारियों के पीएफ की रकम ईपीएफओ में डालने के बजाय खुद उसका प्रबंधन करती हैं। देश में ऐसे एग्जेम्प्ट ट्रस्टों की संख्या 3,000 से ज्यादा है और उन्हें ईपीएफओ की ओर से पेश दर के बराबर ब्याज देना होता है। लेखाजोखा के नियमों में बदलाव के बाद सस्पेंस एकाउंट्स की रकम हाथ आने के चलते ईपीएफओ ने पीएफ की रकम पर 9.5 फीसदी रिटर्न देने की घोषणा की है, लिहाजा चिंता जताई जा रही है कि एग्जेम्प्ट ट्रस्ट ईपीएफओ के बराबर रिटर्न नहीं दे पाएंगे। 

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इनकम जिन पर टैक्स नहीं:
ये कुछ ऐसे इनकम हैं, जो इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते। अगर आपकी आय इन साधनों से हैं, तो आपको टैक्स के मोर्चे पर बिल्कुल चिंता करने की जरूरत नहीं है।

आइए हम आपको बताते हैं कि वे कौन-कौन से इनकम हैं, जिन पर टैक्स नहीं लगता...


खेती से होने वाली इनकम खेती से होने वाली इनकम - खेती या इससे जुड़े काम से होने वाली किसी भी तरह की आय इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती है। अगर आपके पिताजी खेती करते हैं और आपको वह अपनी इनकम का कुछ हिस्सा गिफ्ट करते हैं तो इस पर टैक्स देने की कोई जरूरत नहीं है, बशर्ते आपके पिताजी टैक्स रिटर्न फाइल करते हों।

पार्टनरशिप फर्म से होने वाली आय - पार्टनरशिप फर्म से होने वाली आय पार्टनरशिप फर्म से होने वाली आय
अगर आप किसी फर्म में पार्टनर हैं और इसका टैक्स निर्धारण हो चुका है, तो इस फर्म से आपको मिलने वाली आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि पार्टनरशिप डीड के मुताबिक, प्रॉफिट में मौजूद आपके हिस्से की राशि टैक्स योग्य होगी।

5000 रुपये: 5000 रुपये
5,000 रुपये तक होने वाली कोई भी वैसी इनकम (प्राइज मनी को छोड़कर)जो बार-बार नहीं होती है, आपकी कुल आय में से घटा दी जा सकती है। 

ट्रैवल कन्सेशन/सहायता: ट्रैवल कन्सेशन/सहायता
कंपनी की ओर से पूरे परिवार समेत भारत में कहीं भी घूमने के लिए मिलनेवाली रकम भी टैक्स छूट के दायरे में आती है। यह क्लेम 4 सालों में 2 बार किया जा सकता है।

परिवार में बीवी, बच्चे, माता-पिता, भाई और बहन (ये दोनों अगर आप पर डिपेंडेंट हैं)को शामिल किया जाता है। हालांकि अगर आईटी डिपार्टमेंट आपसे इस बारे में पूछता है, तो आपको इस बाबत ऑरिजिनल बिल पेश करना होगा।
रिटायरमेंट/डेथ ग्रैच्युटी:रिटायरमेंट/डेथ ग्रैच्युटी
 किसी शख्स या उसकी विधवा, बच्चे या कोई और भी डिपेंडेंट को पेंशन या डेथ कम रिटायरमेंट ग्रैच्युटी स्कीम के तहत मिलने वाली राशि भी टैक्स छूट के दायरे में आती है।

ग्रैच्युटी की राशि का आकलन नौकरी के कुल साल को पिछले 10 महीनों की सैलरी के एवरेज की आधी रकम से गुना कर निकाला जाता है
छुट्टियों के बदले मिलने वाली सैलरी:छुट्टियों के बदले मिलने वाली सैलरी  
अगर आप रिटायरमेंट के वक्त अपनी बची हुई छुट्टियों के बदले कैश लेते हैं, तो इस पर भी कोई टैक्स नहीं लगता है। (यह सिर्फ केंद्र/राज्य सरकार के एंप्लॉयीज पर लागू है)। सरकारी एंप्लॉयीज के अलावा ऐसी छुट्टियों को इनकैश कराने की अधिकतम अवधि 10 महीने ही है। साथ ही हरेक साल ऐसी छुट्टियों की तादाद 30 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 

छंटनी/वीआरएसछंटनी/वीआरएस  छंटनी: कंपनी के बंद होने की सूरत में अगर आपको मुआवजे के तौर पर कुछ मिलता है तो इस पर भी इनकम टैक्स का बोझ नहीं सहना पड़ेगा। वीआरएस: वॉलेंटरी रिटायरमेंट (वीआरएस) के वक्त 5 लाख तक मिलने वाली रकम पर इनकम टैक्स नहीं लगता है। हालांकि वीआरएस देने वाली कंपनी के पास सरकार द्वारा प्रस्तावित वीआरएस का ढांचा होना चाहिए। 

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी : लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी 
लाइफ इंश्योरेंस: इससे मिलने वाला किसी तरह का फायदा (बोनस समेत) इनकम टैक्स के लिए गणना की जाने वाली टोटल इनकम में शामिल नहीं किया जाता है।

प्रोविडेंट फंड: प्रोविडेंट फंड से मिलने वाली हर तरह की राशि, जो पीएफ एक्ट के तहत मान्य है और सरकार का किसी भी तरह का पीएफ फंड छूट के दायरे में आता है।

रेंट की अदायगी रेंट की अदायगी : अगर आपके किराए का भुगतान आपकी कंपनी करती है, तो इस राशि पर आपको कोई टैक्स नहीं लगेगा। हालांकि अगर आपका अपना घर है, तो यह नियम नहीं लागू होगा।  





कुछ और इनकम... कुछ और इनकम... - सरकारी सिक्योरिटी: सिक्योरिटी बॉन्ड, सेविंग सर्टिफिकेट्स या केंद्र सरकार द्वारा जारी किसी भी तरह के इंस्स्ट्रूमेंट्स से प्राप्त होने वाली इनकम पर टैक्स छूट का फायदा मिलता है।

अवार्ड एंड रिवार्ड: अगर आपको किसी संस्थान से कैश के रूप में पुरस्कार मिलता है और यह संस्था केंद्र या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है तो इस रकम पर टैक्स में छूट का फायदा मिलेगा। रिलीफ फंड: अगर आप प्रधानमंत्री राहत कोष, स्टूडेंट फंड या सांप्रदायिक सौहार्द फाउंडेशन फंड में डोनेशन देते हैं, तो यह राशि पूरी तरह कर मुक्त होगी।