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सुभिक्षा से कर्ज वसूली के लिए DRT की चौखट पर ICICI बैंक-
आईसीआईसीआई बैंक ने बंद हो चुकी रीटेल चेन
सुभिक्षा से कर्ज वसूली के लिए डेट रिकवरी ट्राइब्यूनल (डीआरटी) के दरवाजे पर दस्तक दी है। सुभिक्षा पर आईसीआईसीआई बैंक के 150 करोड़ रुपए बकाया हैं। इस मामले पर डीआरटी इस महीने अंतिम फैसला दे सकता है। सुभिक्षा को नकदी संकट की वजह से अपने सभी रीटेल स्टोर बंद करने पड़े थे। इसके बाद से कंपनी के खिलाफ बहुत से मुकदमे दायर हुए हैं। इनमें से ज्यादातर कर्जदाताओं और निवेशकों ने किए हैं।

सुभिक्षा को 13 बैंकों के 750 करोड़ रुपए चुकाने हैं। इनमें से आईसीआईसीआई बैंक की सबसे अधिक रकम फंसी है। आईसीआईसीआई बैंक का आवेदन मिलने के बाद डीआरटी ने कुछ महीने पहले एक अंतरिम आदेश में सुभिक्षा के प्रमोटर आर सुब्रमणियन को ट्राइब्यूनल के रजिस्ट्रार के पास अपना पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया था। इसके अलावा, ट्राइब्यूनल की लिखित अनुमति के बिना सुब्रमणियन पर देश से बाहर जाने पर भी रोक लगाई गई है। इसके अलावा, सुभिक्षा को 31 मार्च, 2006 तक की अपनी संपत्तियों और देनदारियों का एक शपथपत्र और पिछले तीन वित्त वर्षों की वार्षिक रिटर्न की प्रतियां भी देने को कहा गया है। हालांकि, मद्रास उच्च न्यायालय ने पिछले महीने इस आदेश को रद्द कर दिया था।

अदालत का कहना था कि डीआरटी के पास पासपोर्ट जब्त करने का कोई अधिकार नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने सुब्रमणियन को यह लिखित हलफनामा देने को कहा था कि वह अदालत की अनुमति के बिना देश छोड़कर नहीं जाएंगे। अंतिम फैसले के लिए मामला वापस डीआरटी के पास भेज दिया गया था। ऐसी उम्मीद है कि डीआरटी इस मामले की सुनवाई इस महीने में पूरी कर लेगा। डीआरटी अधिकतम राहत के तौर पर रिकवरी सर्टिफिकेट जारी कर सकता है लेकिन इससे आईसीआईसीआई बैंक को मदद मिलना मुश्किल है क्योंकि सुभिक्षा के पास कोई महंगा एसेट नहीं है। इसके सभी स्टोर किराए के परिसरों में चल रहे थे और कंपनी द्वारा वेतन को लेकर डिफॉल्ट किए जाने के बाद इनमें रखा सामान भी लूट लिया गया था।

सुभिक्षा पर सरकार भी शिकंजा कस रही है। ऐसी रिपोर्ट है कि कंपनी मामलों के मंत्रालय ने इस मामले की जांच गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को सौंप दी है। पिछले वर्ष निवेशकों और सुभिक्षा के पूर्व कर्मचारियों द्वारा फंड के गलत प्रबंधन का आरोप लगाए जाने के बाद चेन्नई में रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने सुभिक्षा के बही खातों की जांच शुरू की थी। मद्रास उच्च न्यायालय में सुभिक्षा के खिलाफ बहुत से मामले लंबित हैं। सुभिक्षा ने ट्राइएड ट्रेडिंग सर्विसेज नाम की फ्रेंचाइजी के तहत कुछ स्टोर दोबारा खोले हैं।